Monday, November 25, 2013

वे किसी भी वक्त संवाद और विचार विमर्श के लिए तैयार नहीं है। न थे।


  • वर्ण वर्चस्व के नस्ली लोकतंत्र में जो होता है,उसे समझने के लिए अब लीजिये, इकानामिक टाइम्स का वह लेख और अंदाजा लगाइये कि हम कितनी गहराई में हैं या सतह पर ही तूफान रच रहे हैं।
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    • Kripal Bisht and Amit Rana like this.
    • Vilas Kharat पलाश बिस्वास यह व्यक्ति से सावधान ,यह दलाल किस्म का व्यक्ति है . वह बी डी.बोरकर के इशारे पर बॉम्बे का बामसेफ यूनिट तोड़ने में शामिल थे .उसका लड़का और वह कुछ साल पहले दलाली के लिए महाराष्ट्र आये थे ,उसके लड़के ने बहुत सारी हरकते कि ,यह लड़का क्रिमिनल प्रवृति का था ,उसे कुछ दिन वह बामसेफ ऑफिस में भी था .पलास बिस्वास बच्चे के काले करतूतो को ढकने का काम किया मगर जब उसे भी बच्चा सरदर्दी हुआ तब उसने स्टीवन बिस्वास नाम के अपने बच्चे को बी डी बोरकर के साथ गुप्त संधान किया ,खास बात बर्वे ने उसे साथ दिया .यही सिद्धार्थ बर्वे कि बीवी उप्पेर caste कि है ,बर्वे और बिस्वास को कोण जनता है ? निजी स्वार्थ के लिए बामसेफ संघटन नहीं है ,त्याग और समर्पण से यह संघटन कि नीव खड़ी है . पलास बिस्वास मूलनिवासी साथियो के वाल पर संघटन के खिलाप भोंक रहे है क्यों कि उनके ब्राम्हण आंकाओंने उने वैसा करने को कहा है ! यह केवल सतर्कता कि जानकारी है इस पर मै ज्यादा लिखूंगा तो कुत्तो को ज्यादा मह्त्व हो जायेगा . 

      Palash Biswas

      Pijush Kanti Gayen

      Shibani Biswas
    • Pradeep Kamble Aise dum hilane wale KUTTOKA ilaj karana ho VILASJI.


मूलनिवासी साथियों,

पहले फर्जी नाम से हम सभी कार्यकर्ताओं के खिलाफ दुष्प्रचार करनेवाले अब खुलकर मैदान में आ गये हैं। वे किसी भी वक्त संवाद और विचार विमर्श के लिए तैयार नहीं है। न थे। अब मनगढ़त आरोप लाने की अपनी दक्षता का इजहार कर रहे हैं।उन्होंने अब तक हमारे मुद्दों पर कोई जवाब  दिया ही नहीं है। आज तक ये लोग सवाल करने वाले तमाम लोगों को गद्दार और दलाल साबित करने में दिन रात की गयी फंडिंग का इस्तेमाल करते रहे हैं। आंदोलन का नेतृत्व हम नहीं कर रहे हैं। जो कर रहे हैं, मुद्दों पर संवाद की जवाबदेही भी उनकी है। मेरा बेटा बामसेफ का होलटाइमर रहा है। लेकिन वह एक जिम्मेदार पत्रकार है। वहआंदोलन से किसी तरह संबद्ध नहीं है। उसे मुद्दा  बनाकर असली सवालों को टालते हुए मेरे हर स्टेटस पर गाली गलौज का इस्तेमाल करते हुए बामसेफ मीडिया प्रमुख ने अपनी अनंत विद्वता का ही परिचय दिया है। उनके अनर्गल आरोपों का जवाब देने की कोई जरुरत नहीं है क्योंकि देशभर के कार्यकर्ता उनके फंडे को अच्छी तरह जानते हैं और आरोप गढ़ने और साबित करने की उनकी यही मशीनरी ही अब तक के जनांदोलन की कुल उपलब्धि है।


हर स्टेटस पर एक ही टिप्पणी लगाकर उन्होंने पाठकों का ध्यान हटाने की कोशिश की है। हम बतौर तर्क मान भी लें कि उनके आरोप सही हैं,इससे हमारे सवालों के जवाब कैसे बनते हैं।बामसेफ के उद्देश्य,मिशन,कार्यपद्धति और संगय़नात्मक ढांचा ,बुनियादी मुद्दों से किसी कार्यकर्ता पर लगाये जाने वाले आरोपों के क्या संबंध हो सकते हैं।इससे उनकी दूरदृष्टि का परिचय मिलता है और दुर्भाग्य है कि ऐसे ही काबिल विद्वान लोगों के हातों में आंदोलन की बागडोर है,जो अंबेडकर के परिजनों को नहीं बखशते वे सामान्य कार्यकर्ताओं की कितनी इज्जत करते हैं,आप स्वयं उनकी टिप्फणियों में बांच लें।


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