रंगीनियों का खुला बाजार और डॉ0 लेनिन की रिपोर्ट में किया पर्दाफाश!
मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
भारत में भ्रष्टाचार के विविध आयाम और बाजार, राजनीति से लेकर जीवन के हर क्षेत्र में उसकी इंद्रधनुषी छटा पर हाय तौबा मचाने वाले लोग खुली अर्थ व्यवस्था के भी पैरोकार हैं। इनमें से अनेक विशेषज्ञ खुले बाजार के मुताबिक रिश्वत और कमीशन को वैधानिक बनाकर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की राह भी बताते हैं। अपने पद और स्थिति का फायदा उठाने की अजब दास्तां निजता की पवित्रता में तब्दी ल हो जाती है जबकि नागरिकों की निजता और संप्रभुता, उनके नागरिक और मानव अधिकारों के हनन को खुले बाजार की समृद्धि का द्योतक बताया जाता है। भ्रष्टाचार की इस पवित्र गंगा का उद्गम वैश्वक पूंजी है, इस हकीकत को मानने में कारपोरेट लाबिंग और कारपोरेट सरकार व व्यवस्था के पैरोकारों को खास तकलीफ होती है। हमारे तमाम नीति निर्धारकों और आम आदमी के भाग्य विधाता के तार जिस अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष से जुड़ते हैं, उसके गलियारे में बिखरी रंगीनियों के साझेदार बनने से उन्हें कौन रोक सकता है?अपनी बिंदास जीवनशैली के कारण सरेआम बदनाम होने वाले आईएमएफ के पूर्व प्रमुख दोमिनिक स्त्रॉस कान की मुश्किलें फिर से बढ़ सकती हैं। फ्रांस के अभियोजकों ने कहा कि वे कुछ गवाहों के उस दावे की जांच कर रहे हैं कि स्त्रॉस कान वाशिंगटन में सेक्स पार्टी के दौरान सामूहिक बलात्कार में संलिप्त थे। जिस्मफरोशी से जुड़े संगठित गिरोह चलाने के मामले में स्त्रॉस कान, दो कारोबारियों और एक पुलिस प्रमुख को पहले ही आरोपी बनाया गया है। उत्तरी फ्रांस के शहर लिले में स्थित अभियोजन कार्यालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि जांच मजिस्ट्रेट ने कुछ सबूत सौंपे हैं, जिनके आधार पर इन लोगों के खिलाफ सामूहिक बलात्कार का मामला दर्ज किया जा सकता है।वर्ष 2010 के दिसंबर में वाशिंगटन में सेक्स पार्टी आयोजित की गई थी। इसमें शामिल बेल्जियम की एक यौनकर्मी ने आरोप लगाया था कि उस पार्टी में उसकी मर्जी के खिलाफ उसे यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया। इस पार्टी में स्ट्रॉस कान मौजूद थे। पार्टी में शामिल एक अन्य स्कॉर्ट ने भी आंशिक तौर पर इस बात की पुष्टि की है कि उस दौरान सामूहिक बलात्कार किया गया था। फर्क सिर्फ इतना है कि अमेरिका या पश्चिमी दोशों में जहां भल क्लिंटन को भी कटघरे में खड़ा किया जा सकता है, वहां भारत में आप भंवरी देवी का मामला हो या सेकेस सीडी कांड, किसाका बाल बांका नहीं कर सकते।खुला बाजार की महिमा ऐसी है कि न्याय का भी खुला बाजार चालू है। इस सिलसिले में डॉ0 लेनिन रघुवंशी की रिपोर्ट गौर करने लायक है , जिसमें भारतीय न्याय व्यवस्था की एक बानगी पेश की गयी है।
भारत में कोई अचरज नहीं कि कुछ प्रावधानों पर कई मंत्रियों के असंतोष के चलते कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) विधेयक में संशोधन को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिल पाई।सूत्रों ने बताया कि इसलिए विधेयक को गृह मंत्री पी चिदंबरम की अध्यक्षता वाले मंत्रियों के समूह को भेज दिया गया है।मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल और महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ उस मंत्रियों के समूह के अन्य सदस्य हैं जो इस मुद्दे पर गौर करेगा।विधेयक में घरेलू सहायकों और श्रमिकों को इस विधेयक के दायरे में लाने का प्रस्ताव है।
उम्मीद है कि यौन उत्पीड़न के मामले में घरेलू सहायकों के रूप में पंजीकृत 47.5 लाख महिलाओं को शीघ्र निस्तारण मुहैया कराएगा।एक वरिष्ठ मंत्री ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर कहा,'विधेयक पर कुछ चर्चा की आवश्यकता है. आप उसे पूरी तरह से एकपक्षीय नहीं कर सकते।'सूत्रों ने कहा कि सदस्यों की मुख्य आपत्ति यह थी कि विधेयक में सभी बातें शिकायतकर्ताओं के पक्ष में हैं और बेगुनाही साबित करने की जिम्मेदारी नियोक्ताओं पर है जो कि झूठे शिकायतों को बढ़ावा दे सकता है।
इस बीच ग्लोबल हिंदुत्व के समर्थकों के लिए खुश खबरी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा छह नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के संभावित उम्मीदवार मिट रोमनी से वर्जीनिया राज्य में आगे चल रहे हैं। एक नए सर्वेक्षण में यह बात कही गई है। द वाशिंगटन पोस्ट अखबार द्वारा कराए गए सर्वेक्षण के मुताबिक ओबामा प्रशासन की नीतियों को लेकर लोग विभाजित हैं। सर्वेक्षण में 51 प्रतिशत ने ओबामा का समर्थन किया, जबकि 44 प्रतिशत ने रोमनी का। अब यह कोई छुपा रहस्य नहीं है कि हिंदुत्ववादी तोकतों की वाशिंगटन के नीति निर्धारम में क्या और कितनी भूमिका है। भारत में आगामी लोकसभा चुनाव में इसका असर देखा जा सकता है , जबकि बाजार समर्थित राष्ट्रपति मिल जाने के बाद बाजार को अपनी पसंद की सरकार बनाने के मौके होंगे। इसीलिए आर्थिक सुधारों को लेकर इतनी मारामारी है और बाजार की धड़कनों के साथ नत्थी है संसदीय लोकतंत्र।क्षेत्रीय क्षत्रपों की मर्जी भी बाजार से जुड़ी हैं, यह समझना कोई मुश्किल नहीं है। मुलायम और ममता को पटाने के लिए यूपीए की सांसें जरूर फूल रही हैं।पर इल क्षत्रपों की मांगें भी आर्थिक है। यानी पैसा दो और वोट लो। मसलन ममता बनर्जी ने कहा कि उम्मीदवार का नाम तय हो जाने के बाद उनकी पार्टी इस बारे में विचार करेगी। पीएम से मुलाकात के बाद बनर्जी ने कहा, 'राष्ट्रपति चुनाव पर हमारे सभी विकल्प खुले हैं. अभी इस चुनाव में काफी समय बचा है और उम्मीदवार तय हो जाने पर हम इस बारे में विचार करेंगे।'क्या वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति बनने की रेस में नहीं हैं? क्या वो रेस में हैं लेकिन खुलकर कुछ बोलना नहीं चाहते हैं? ये सवाल इसलिए खड़े हुए हैं क्योंकि राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अपनी उम्मीदवारी की खबरों को प्रणब मुखर्जी ने अटकलें करार दिया है। बैंकॉक में एशियन डेवलपमेंट बैंक के सम्मेलन से हिस्सा लेकर लौटे प्रणब मुखर्जी से जब राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सब अटकलें हैं।प्रणव यूपीए के नहीं, बाजार के उम्मीदवार हैं । उनके विकल्प के तौर पर सैम पित्रौदा को ओबीसी अवतार के रुप में भी पेश किया जा रहा है।बाजार के आगे किसी की नहीं चलती, मुस्लिम वोट बैंक समीकरण की भी नहीं। ऐसा मुलायम ने किसी भी समुदाय से राष्ट्रपति बनाये जाने की राय पर सहमति देकर साफ कर दिया है। प्रणव को समर्थन देने का संकेत देते हुए वामपंथियों ने भी बाजार की ही मिजाजपुर्सी की है।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए नया मापदंड निर्धारित करने और विशेषज्ञों की नई समिति बनाने की मांग की। नई दिल्ली रवाना होने से पहले हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से नीतीश ने कहा कि बिहार विशेष राज्य के दर्जा का हकदार है। उन्होंने कहा कि केंद्र को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए नए मापदंड निर्धारित करनी चाहिए और विशेषज्ञों की नई कमेटी बनानी चाहिए।
इस बीच सेनसेक्स की चाल खुले बाजार की रफ्तार बढ़ाने के लिए लगातार कारपोरेट लाबिइंग का बेहतरीन औजार साबित हो रही है। दलाल स्ट्रीट में शुक्रवार को लगातार तीसरे सत्र में गिरावट का दौर जारी रहा। मॉरीशस कर संधि की समीक्षा को लेकर नए सिरे से उपजी चिंता और कमजोर रुपये को देखते हुए निवेशकों ने जोरदार बिकवाली की। इससे बंबई शेयर बाजार [बीएसई] का सेंसेक्स 320.11 अंक यानी 1.87 प्रतिशत लुढ़ककर तीन महीने में पहली बार 17000 अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। बीएसई का यह संवेदी सूचकांक 16831.08 अंक पर बंद हुआ। गुरुवार को यह 17151.19 अंक पर बंद हुआ था।
दूसरी ओर विनिवेश के लक्ष्य पर ठहराव में खड़ी ए्र इंडिया का बाजा अब अमेरिका में भी बजने लगा है।अमेरिका के परिवहन विभाग ने उड़ान में विलंब से सम्बंधित जानकारी यात्रियों को उपलब्ध न कराने पर भारत की सरकारी विमानन कम्पनी एयर इंडिया पर 80,000 डॉलर का जुर्माना लगाया है।यात्रियों के विमान में बैठने के बाद उड़ान में होने वाली देरी को रोकने के लिए विभाग ने अगस्त 2011 में इस नियम को लागू किया था।विभाग ने कहा कि हवाईपट्टी से उड़ान में होने वाली देरी एवं ग्राहक सेवा से सम्बंधित जानकारियां अपनी वेबसाइट पर डालने में असफल होने पर एयर इंडिया पर यह जुर्माना लगाया गया है। विभाग ने बताया कि विमानन कम्पनी अपने वैकल्पिक शुल्क के बारे में भी यात्रियों पर्याप्त जानकारी देने में नाकाम हुई है।एयर इंडिया ऐसी पहली विदेशी कम्पनी है जिस पर विभाग ने अर्थदंड लगाया है। अमेरिकी परिवहन सचिव रे लाहूड ने कहा कि हमारे नए विमानन उपभोक्ता नियम यात्रियों को विमान की सेवाओं और शुल्क के बारे में पूरी जानकारी सुनिश्चित कराने में मदद करते हैं।उन्होंने कहा कि विमानन कम्पनियां हमारे नियमों का पालन कर रही हैं, इसे सुनिश्चित करने के लिए हम लगातार अपनी निगरानी जारी रखेंगे।
डॉ0 लेनिन रघुवंशी की रिपोर्ट में पेश है उस प्रेमा देवी की ख़ुदबयानी जिसकी सोलह साल की बेटी के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ और जब थाने वो में रपट लिखाने पहुंची तो दीवान साहब ने बलात्कार पीडिता को कहा 'ये तो प्रेम प्रपंच का मामला है। देख नहीं रहे हो, कैसा कपड़ा पहनी है। काहे अपने माँ-बाप को परेशान करती हो। बता दो कि तुमसे गलती हो गयी है, तुम अपनी मर्जी से गयी थी'।सरोकार में छपी रपटसे साफ जाहिर है छोटे से छोटे ओहदे पर काबिज किसी भी शख्स के लिए महिलाउत्पीड़न विशेषाधिकार है। पेश है यह रपट, जिसे सर्वोच्च स्तर तक लागू समझा जाना चाहिए।डॉ0 लेनिन रघुवंशी 'मानवाधिकार जन निगरानी समिति' के महासचिव हैं और वंचितों के अधिकारों पर इनके कामों के लिये इन्हें 'वाइमर ह्युमन राइट्स अवॉर्ड', जर्मनी एवं 'ग्वांजू ह्युमन राइट्स अवॉर्ड', दक्षिण कोरिया से नवाज़ा गया है. इनसे pvchr.india@gmail.com पर संपर्क साधा जा सकता है।
मैं प्रेमा देवी, पत्नी-लालमणि भारद्वाज, ग्राम-असवारी, पोस्ट-कुआर बाजार, ब्लॉक-बड़ागाँव, थाना-फूलपुर, तहसील-पिण्डरा, जिला-वाराणसी (उ0प्र0) की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र-55 वर्ष है। हमारे दो लड़की और एक लड़का है। पति मुम्बई में काम करते हैं। बेटा भी उन्हीं के साथ काम करता है। मैं अपने दोनों लड़कियों के साथ अपने घर पर रहती हूँ. बड़ी लड़की संजू 25 साल की है. उसकी शादी हो चुकी है, आती-जाती रहती है. छोटी नीलम 16 साल की है और शाहजहाँ गर्ल्स इण्टर कालेज कुआर में कक्षा दसवीं में पढ़ती थी। गाँव में लड़के-लड़कियों के ग़लत सम्बन्धों के बारे में सुन कर नीलम का विवाह मैं जल्दी करना चाहती थी।
16 सितम्बर, 2010 को नीलम की शादी के लिए रिश्ता वाले आए. हमारी लड़की नीलम उन्हें पसन्द आ गयी। उन्होंने हमारी लड़की को पाँच सौ एक रुपये तथा साथ में मिठाईयाँ भी दिये। इसके बाद शाम लगभग चार बजे तक वापस अपने घर चले गये।
उसी दिन शाम के लगभग सात बजे हमारी बेटी नीलम शौच के लिए पड़ोस की एक लड़की के साथ जाने लगी। तब मैंने नीलम से कहा कि लौटते वक़्त रोड की दुकान से एक माचिस लेते आना और जल्दी आना। पर घंटा बीत जाने पर भी नीलम नहीं आयी। मैं चिंतित हो रही थी। अपनी बड़ी संजू से मैंने कहा कि देखो अभी तक नीलम नही आयी। संजू ने कहा कि हो सकता है कि वो अपनी सहेली के घर चली गयी होगी। कुछ समय और बीत गया। इस बार मैंने संजू से कुछ नहीं कहा क्योंकि उसके पेट में 5 माह का गर्भ था। मैं स्वंय नीलम को खोजने रोड की तरफ़ निकल पड़ी। वहाँ न मिलने पर मैं उसकी सहेली के घर गयी। वहाँ भी नीलम नहीं मिली। मेरी चिन्ता बढने लगी। तब तक पता चला कि नीलम को मोटर साईकिल पर सवार दो लोगों ने दबोचकर जबरदस्ती मुँह दबाकर उठा ले गये। यह सुनते ही सड़क के बीचोंबीच मैं गश के कारण गिर पड़ी। मेरा माथा फट गया। तब तक चार पाँच लोग आ गये। फिर मैं एकाएक उठी, सबके पैर पकड़ने लगी कि जरा देखें कि मेरी बेटी को कौन उठाकर ले गया, किधर उठा कर ले गया। उस समय सावन-भादो का घनघोर अंधेरा था।
मैं पगली की तरह सड़क पर इधर-उधर दौड़-दौड़ कर नीलम को खोजने लगी। लेकिन हमारी बेटी का पता नही चला। मैं भागकर अपने घर आयी। आस-पड़ोस के ताना-मेहना के डर से रो भी नहीं पा रही थी। अपने घर में ही सर पटक-पटक कर भगवान का पूजा करने लगी। कुछ-कुछ देर में घर से बाहर, अगल-ब़गल, इधर-उधर घूम-घूम कर ढूंढती रही कि कहीं हमारी बेटी नीलम मिल जाये। जब कहीं नही मिली तब हमें लगा कि हमारा हार्ट अटैक हो जायेगा।
घर में कोई आदमी नहीं था नीलम को कहीं ढूँढे या पता करे। मैं अपने कलेजे पर पत्थर रख कर घर में बैठ गयी। आँख से आँसू तो गिर रहे थे मगर मुँह से आवाज़ नही़ आ रही थी। जब-जब कुत्ता भौंकता या खड़खड़ाहट की आवाज़ आती थी तो मैं अपना जंगला खोल लेती थी, बाहर निकल कर ढूंढने लगती थी।
घनघोर अंधेरी रात में कुछ भी दिखाई नहीं देता था। फिर जंगला उसी प्रकार खोल कर बैठी रहती थी। दर्द से मेरा सिर फटा जा रहा था। उस समय तक हमारे सिर से खून टपकता रहा था। बैठे-बैठे भोर के लगभग तीन बज गये। तभी ज़ोर से मेरा जंगला खड़खड़ाया और धड़ाम से गिरा। मैं दौड़कर बाहर निकली। जमीन पर टटोलने लगी। हमारे हाथों से एक शरीर टकरायी, वह नीलम थी। मैं अपने हाथों से उसके बदन व कपड़ो को टटोलने लगी। हमें लगा कि कोई उसे चाकू मारकर फेंक दिया। उसके दोनों हाथों को पकड़कर जमीन से घसीटते हुए घर के अन्दर ले गयी। उसका सिर हिला-डुला कर देखने लगी। नीलम एक दम बेहोशी की हालत में पानी में लथपथ थी। संजू और मैंने उसके कपड़े बदले। फिर रजाई और कम्बल से उसे पूरी तरह ढक दिया। कुछ देर बाद नीलम ने कराहना शुरू कर दिया। हमलोगों ने उससे पूछा कि तुम्हारे साथ क्या हुआ, बताओ। डरो मत, जो हुआ साफ-साफ बताओ।
मगर नीलम कुछ नहीं बोली। फिर भी मैं लगातार प्रयास करती रही कि नीलम कुछ बोले कि कौन-कौन उठाकर ले गये थे, कहाँ ले गये थे। मगर भय से वो कुछ नहीं बोली। इसके बाद अहिरानी गाँव के सुरेश से मंगला जी को सुबह अपने घर बुलवायी। उनके आने पर नीलम से हम लोगों ने घुमा फिरा कर कुछ सवाल पूछे। तब नीलम ने बताया कि छोटेलाल पटेल और एक अन्य आदमी मुझे जबरदस्ती उठाकर ले गये और हमारा रेप किया। किसी तरह से मैं अपना जान बचा कर वहाँ से भागी। और फिर उसकी आँखों से झर-झर आंसू बहने लगे। हम सब भी रोने लगे।
इसके बाद मैं और मेरी बेटी नीलम थाना-फूलपुर में एफ0आई0आर0 कराने गयी। थाना-फूलपुर में मुंशी (दीवान) हमें समझाने लगा कि एफ0आई0आर0 मत कराओ नहीं तो इसका विवाह-शादी कहाँ होगा और इससे कौन शादी करेगा। तब तक दूसरा मुंशी (दीवान) कहने लगा, 'यह अपनी मर्जी से भाग गयी थी। इसका रेप नहीं हुआ है। यह प्रेम-प्रपंच का मामला है। देख नहीं रहे हो, कैसा कपड़ा पहनी है। काहे अपने माँ-बाप को परेशान करती हो। बता दो कि तुमसे गलती हो गयी है, तुम अपनी मर्जी से गयी थी।' उसकी बातों को सुनकर हमारी बेटी फिर रोने लगी। तब दूसरे दीवान ने कहा, 'देखो कैसे नखड़ा कर रही है।' इसके बाद थाने के एस0आई0 आये और कठिराँव चौकी के अंतर्गत असवारी गाँव में जाने के लिए चौकी इंचार्ज बाल गोविन्द मिश्र को उन्होंने वायरलेस से सूचना दी।
चौकी इंचार्ज असवारी गाँव गये। छानबीन की और बताया किया कि लड़की के साथ रेप नहीं हुआ है, इसके साथ छेड़छाड़ हुआ है। तब छेड़छाड़ का मुकदमा पंजीकृत कराये और उसक मेडिकल बनाने हेतु पी0एच0सी0 पिण्डरा होमगार्ड के साथ भेज दिये। वहाँ महिला डॉ. न होने के कारण मेडिकल नहीं हो सका। फिर जिला चिकित्सालय में मेडिकल हुआ। इसके बाद मैं नीलम के साथ वापस गाँव गयी। गाँव का कोई भी व्यक्ति मिलता था तब उससे पूरी तरह नज़र नहीं मिला पाती थी।
पड़ोस के लोग नीलम को ताना मारने लगे। हमारी बेटी नीलम हमसे आकर सारी बातें बताती है। लेकिन छोटेलाल पटेल की गिरफ्तारी का भय सबको बनने लगा है। नीलम के साथ जहाँ रेप हुआ, उधर मेरा खेत पड़ता है। जब-जब अपने खेत की तरफ़ जाती हूँ, हमें अपनी बेटी की दर्दनाक बातें सोच कर सब कुछ याद आ जाता है। उस समय हमें कुछ भी दिखाई नहीं देता है और चक्कर आने लगता है। अपनी पीड़ा बता कर मेरी आँखो से आँसू गिरने लगते हैं। पर आपसे अपनी तकलीफ बांटकर कुछ हल्का महसूस कर रही हूं। बस यही सोचती रहती हूँ कि हमारे साथ जो घिनौना और अमानवीय कृत्य हुआ है, उसकी भरपायी कैसे हो पायेगी? कैसे न्याय मिल पाएगा मेरी बेटी को अब कैसे सब कुछ सामान्य हो जाएगा? हालांकि मैंने न्याय की उम्मीद छोड़ी नहीं है।
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