मेहदी हसन ने एक साइकिल शॉप में काम करना शुरु किया और उसके बाद कार और डीजल ट्रैक्टर मैकेनिक का काम किया। इतनी मुश्किलों के बावजूद संगीत के प्रति उनका प्रेम कम नहीं हुआ. साथ ही साथ उन्होने अपनी गायिकी का रियाज़ भी जारी रखा.......
महान गजल गायक मेहदी हसन का आज दोपहर 12 बजे के करीब पाकिस्तान के करांची शहर में निधन हो गया। भारत में जन्मे और पाकिस्तान में रहे मेहदी हसन के भारत समेत दुनिया भर में लाखों प्रशंसक हैं, जिन्हें इस मर्माहत कर देने वाली खबर से गहरा शोक पहुंचा है। वह 84 वर्ष के थे और पिछले दिनों से करांची के अगा खान अस्पताल में भर्ती थे।

अपनी सुरीली गजलों से संगीत प्रेमियो के दिलों पर राज करने वाले गजल बादशाह मेहदी हसन को कराची के आगा खान अस्पताल में आईसीयू में भर्ती कराया गया था। मेहदी हसन के बेटे आरिफ हसन के अनुसार उनके पिता 12 साल से बीमार थे, लेकिन इस बार उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी। उनके फेफड़े और छाती में इन्फेक्शन हो गया था। उन्हें कई साल से फेंफड़ों, सीने सम्बंधी व कई अन्य बीमारियां थीं। मल्टी आज मल्टी आर्गन फैल्योर के कारण उनकी मृत्यु हो गयी। पिछले कइ महीनों से उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी।
हसन को पिछले महीने ही आगा खान अस्पताल से छुट्टी दी गई थी। वे एक दिन बाद ही दोबारा अस्पताल पहुंच गए थे, लेकिन उन्हें वेंटीलेटर पर नहीं रखा गया था। एक दशक पहले पक्षाघात के दौरे के बाद से वे चलने-फिरने में अक्षम थे।
ग़ज़ल के इस बेताज बादशाह के पूरी दुनियाभर में लाखों प्रशंसक हैं। पिछले दो साल से उन्हें एक ट्यूब के जरिए भोजन दिया जाता था। उन्होंने अपनी आवाज खो दी थी। कुछ समय पह्ले उनके परिवार ने आधुनिक युग के गजल गायक हसन को बचाने के लिए अपील की थी।
गौरतलब है की इस साल अप्रैल में मेहदी हसन को भारत आने के लिए वीजा मिला था, लेकिन शारीरिक दुर्बलता के कारण वे आ नहीं पाए थे। वे अंतिम बार साल 2000 में भारत आए थे। हालाँकि मेहदी हसन को इलाज के लिए भारत लाए जाने की तैयारी भी जारी थी और खुद राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा से अनुरोध किया था कि उन्हें भारत लाने में मदद की जाए।
हसन के घर में उनके नौ बेटे व पांच बेटियां हैं। उन्होंने दो शादियाँ की थीं। उनकी दोनों पत्नियों का निधन हो चुका है।
गजल की दुनिया में योगदान के लिए उन्हें 'शहंशाह-ए-गजल' की उपाधि से नवाजा गया था। मेहदी हसन का जन्म 1927 में राजस्थान के लूना गांव में हुआ था। मेहदी हसन को संगीत की विधा अपने पिता उस्ताद अजीम खान और चाचा उस्ताद इस्माइल खान से विरासत में मिली जो कि परम्परागत द्रुपद गीतकार थे। मेहदी हसन ने अपना पहला म्यूसिक कांसर्ट अपने भाई के साथ वर्ष1935 में किया था।
भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद हसन का परिवार पाकिस्तान चला गया और काफी समय तक आर्थिक संकट से जूझता रहा। उस समय मेहदी हसन ने एक साइकिल शॉप में काम करना शुरु किया और उसके बाद कार और डीजल ट्रैक्टर मैकेनिक का काम किया। इतनी मुश्किलों के बावजूद संगीत के प्रति उनका प्रेम कम नहीं हुआ और साथ ही साथ उन्होने अपनी गायिकी का रियाज़ भी जारी रखा।
मेहदी हसन का गायन में करियर तब शुरु हुआ जब उन्हें रेडियो पाकिस्तान में ठुमरी गायक के रुप में गाने का मौका मिला। उस समय बरकत अली खान, बेगम अख्तर और मुख्तार बेगम गज़ल की विधा के महारथी थे।
अस्सी के दशक में मेहदी हसन गंभीर बीमारी के कारण संगीत की दुनिया से दूर हो गये और उसके बाद बीमारी के लगातार बढ़ते जाने के कारण संगीत से पूरी तरह कट गए। अक्टूबर 2010 में एचएमवी द्वारा रिलीज की गई 'सरहदें' अल्बम में मेहदी हसन और लता मंगेशकर ने मिलकर 'तेरा मिलना..' गज़ल गाई जिसे मेहदी हसन ने खुद कंम्पोज किया था। मेहदी हसन को 'तमगा-ए-इम्तियाज़' का खिताब भी दिया गया था।
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