बोकारो स्टील सिटी गेट किया जाम
राजीव
विस्थापित रैयत कोआपरेटिव सोसाइटी के बनैर तले कांग्रेस के विश्रामपुर से विधायक चंद्रशेखर दुबे उर्फ ददई दुबे के नेतृत्व में 11 जून को 8000 विस्थापितों के नियोजन की मांग को लेकर सूबह 4 बजे से लेकर 10 बजे दिन तक बोकारो स्टील सीटी के सभी गेटो को लगभग 2000 समर्थकों ने जाम कर दिया, जिससे सेक्टर-9 मुख्य सड़क व बिरसा चैक से लेकर कुर्मीडीह गेट तक लगभग 6 घंटे तक आवागमन ठप्प रहा.
चक्का जाम कर रहे समर्थकों ने सबसे पहले बोकारो स्टील सीटी का मंशा सिंह गेट को जाम कर दिया, उसके बाद माराफारी स्टील गेट और फिर सीइजेड गेट जिससे कच्चे माल का आवागमन, मजदूरों और बीएसएल कमर्मियों का आवागमन बाधित हो सके. इसके बाद मेन रोड, प्रशासनिक भवन व सेक्टर-9 का गेट न.3 को समर्थकों ने जाम कर दिया, चक्का जाम आंदोलनकारियों ने अपने हाथों में डंडा लिए हुए थे और बीएसएल के खिलाफ नारे बुलंद कर रहे थे.
पिछले 12 दिनों के अंदर यह तीसरा बड़ा आंदोलन विस्थापितों द्वारा किया गया है. बीएसएल में सूबह के जेनरल सीफट में जाने वाले पदाधिकारियों और कर्मियों को चक्का जाम आंदोलन से सबसे अधिक परेशानियों का समाना करना पड़ा. आंदोलनकारियों ने बोकारो स्टील सीटी के नयामोड़ से सीटी सेंटर व कुर्मीडीह को जाम कर दिया था जिससे शहरवासियों को भी सुबह के समय काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा.
आंदोलन पर काबू तब पाया गया जब सुबह 9 बजे के आसपास ददई दुबे सहित उनके 151 समर्थकों को मंशा सिंह गेट पर गिरफतार कर लिया गया और लगभग 11 बजे उनलोगों को रिहा किया गया. डीएसपी पीएन सिंह ने कहा कि हमलोगों ने दुबे और पूर्व बोकारो विधायक इजरायल अंसारी को उनके 151 समर्थकों सहित गिरफतार कर लिया है और अब स्थिति पर काबू कर लिया गया है.
विधायक दुबे ने 10 बजे चक्का जाम आंदोलन वापस लेने की घोषणा करते हुए कहा कि दो दिनों में यदि प्रबंधन वार्ता नहीं करता है और 8000 विस्थापितों का नियोजन नहीं करता है तो दो दिन बाद लगातार तीन दिन चक्का जाम आंदोलन की घोषणा करेंगें जो अततः अनि'चितकालीन आंदोलन में बदल जाएगा.
गौरतलब है कि चंद्रशेखर दुबे उर्फ ददई दुबे हमेशा कुछ ऐसे मामले को उठाते रहे है जिससे वो सुर्खियों में आ जाते है मसलन पिछले महीने झारखंड़ में राज्य सभा चुनाव के दौरान विधान सभा परिसर में मिडिया के सामने कहा था कि 2010 राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस विधायकों को प्रत्याशी धीरज साहू ने 25.25 लाख रूपए दिये थे. उन्हें भी 25 लाख रूपए देने की कोशिश की गयी थी जिसे उन्होंने ठुकरा दिया. हालांकि इस बार ऐसी उम्मीद की जा सकती है श्री दुबे कुछ सोच समझ कर विस्थापितों को मुद्दा उठाया है जिससे वे सुर्ख़ियों में भी आ जाएँ और विस्थापितों के लिए कुछ कर भी सके.
पेशे से वकील राजीव राजनीतिक विषयों पर लिखते हैं.
No comments:
Post a Comment