सपा ने शुरू किया ब्राह्मण समाज से समन्वय अभियान
इस ब्राह्मण सम्मेलन में समाजवादी पार्टी की ओर से उसके राष्ट्रीय सचिव राजेश दीक्षित (लाल घेरे में) मौजूद थे.बहुजन समाज पार्टी के बाद अब समाजवादी पार्टी ने बड़े पैमाने पर उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण सपा समन्वय सम्मेलन की शुरूआत की है. उत्तर प्रदेश के बारह से पंद्रह प्रतिशत ब्राह्मण मतदाताओं तक पहुंचने के लिए समाजवादी पार्टी ने ब्राह्मण सम्मेलनों के जरिए ब्राह्मण मतदाताओं को रिझाने का काम शुरू कर दिया है. पार्टी में शीर्ष स्तर पर सैद्धांतिक रूप से इस बात पर सहमति बन गई है कि आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर ब्राह्मण मतदाताओं के बीच समाजवादी पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए ऐसे नौ ब्राह्मण सम्मेलनों का खाका खींचा गया है जो पूरे प्रदेश में आयोजित किये जाएंगे जिसकी शुरूआत वाराणसी से की गई है और इसका समापन लखनऊ में किया जाएगा.
आज वाराणसी में जो आयोजन किया गया था, उसका आयोजन हालांकि ब्राह्मणों की एक संस्था ब्रह्म समाज एकता संघर्ष समिति ने किया था लेकिन इसमें मुख्य अतिथि के तौर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राजेश दीक्षित को बनाया गया था. सम्मेलन के लिए पूरे शहर में जो बैनर, पोस्टर और होर्डिंग लगाये गये थे उसमें सांकेतिक तौर पर यह संकेत देने की कोशिश की गई थी कि समाजवादी पार्टी ब्राह्मणों के साथ समन्वय करना चाहती है. बतौर मुख्य अतिथि सम्मेलन में समाजवादी पार्टी की ओर से भेजे गये राजेश दीक्षित ने यहां बोलते हुए पार्टी की ओर से कुछ वादे भी किये जिससे इससे आशंका को और बल मिला कि समाजवादी पार्टी योजनाबद्ध तरीके से ब्राह्मण मतदाताओं में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है.
करीब ढाई तीन हजार ब्राह्मणों के इस सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए राजेश दीक्षित ने कहा कि "पिछली सरकार के एक ब्राह्मण नेता ने ब्राह्मणों से वादा किया था कि वे प्रदेश में ब्राह्मणों का हक दिलाएंगे लेकिन उन्होंने और उनकी सरकार ने हरिजन बनाम सवर्ण के मुकदमों तक को रोकने में कोई कामयाबी नहीं पाई." दीक्षित ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी प्रदेश में "ब्राह्मणों को उसका हक दिलाएगी और उनके सामाजिक और आर्थिक विकास की तरफ ध्यान देगी." हालांकि राजेश दीक्षित इसको जातीय सम्मेलन मानने से इंकार करते हैं और कहते हैं कि यह समन्वय सम्मेलन है. मुलायम सिंह के हवाले से राजेश दीक्षित कहते हैं कि "नेताजी मानते हैं कि ब्राह्मण जन्म से समाजवादी होता है. इस तरह के सम्मेलनों का मूल मकसद ब्राह्मणों के बीच यही संदेश देना है कि वे अपने भीतर छिपे समाजवादी स्वरूप को पहचाने और समाज के बाकी वर्गों के साथ समन्वय करने की दिशा में आगे बढ़ें."
सम्मेलन में पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से आये ढाई तीन हजार लोग मौजूद थे. सम्मेलन की उपयोगिता पर बल देते हुए संयोजकों ने इस बात का तर्क दिया कि पूर्व में भी कई राजनीतिक दल ब्राह्मणों को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करते रहे हैं लेकिन उन्होंने समाजवादी पार्टी से आग्रह किया कि ब्राह्मण उनका जयकारा तो लगा सकते हैं लेकिन सपा उनको वोट बैंक न समझे. यहां बोलनेवाले अधिकांश वक्ताओं ने ब्राह्मणों की दयनीय दशा का रोना रोया और कहा कि वे समाजवादी पार्टी की सरकार से उम्मीद करते हैं कि पार्टी प्रदेश के ब्राह्मणों की दशा सुधारने की दिशा में ठोस पहल करेगी.
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