Friday, July 26, 2013

Subeer Goswamin अट्ठन्नी में भी बात बन सकती थी मगर वो चलती नहीं है

अट्ठन्नी में भी बात बन सकती थी मगर वो चलती नहीं है 
5 रूपए,12 रूपए, 1 रूपए में खाना मिलने वाले ढाबों का ठेका लोकसभा चुनाव से पहले ही मिला करता है फारूख अब्दुल्ला जी से सेटिंग हो तो बात बन सकती है .
500 रूपए के हिसाब से प्रति थाली का भुगतान चुनाव के बाद हो जायेगा ..... निश्चिन्त रहें 
चुनाव आयोग को पता भी नहीं चलेगा........

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