सभी लोग शताब्दी के पीछे पड़े हैं, अपर्णा सेन का नाम कोई नहीं लेता!
एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
शारदा चिटफंट प्रकरण में रोज नये नये नाम जुड़़ते जा रहे हैं। शताब्दी राय अब जाकर मानने लगी हैं कि शारदा समूह के कार्यक्रमों में वे जाती रहीं हैं और उन्हें समूह से भुगतान भी होता रहा है। जो कि फिल्मी दुनिया के लोग किसी भी पेशेवर काम के लिए लेते रहते हैं। लेकिन वे अब भी सुदीप्त की कंपनी के ब्रांड एम्बेसेडर होने की बात सिरे से खारिज करती हैं। उन्हें शिकायत है कि तृणमूल सांसद होने की वजह से ही उन्हें विवाद में फंसाया जा रहा है। अब तृणमूल के लोग ही बचाव में यह दलील दे रहे हैं कि सभी लोग बेमतलब शताब्दी के पीछे पड़े हैं, जबकि कुणाल घोष और अर्पिता घोष की तरह मशहूर फिल्म निदेशक व अभिनेत्री अपर्णा सेन भी शारदा समूह की पत्रिका की संपादक रही हैं। दिनप्रतिदिन श्रद्धासमूह से जुड़ रहने के बाद भी मीडिया में उनका नाम विवाद में सिऱ्फ इसलिए घसीटा नहीं जा रहा है क्योंकि राज्य में मां माटी मानुष की सरकार बनने के बाद सत्तादल से उन्होंने खुद को अलग कर लिया। जबकि दीदी के भूमि आंदलन में वे बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती रही हैं।
मालूम हो कि लंबे समय तक महिलाओं की प्रमुक पत्रिका सानंदा की संपादक बतौर मीडिया में अपर्णा का बहुत सम्मान है। सानंदा छोड़ने के बाद वे श्रद्धा समूक की पत्रिका परमा की संपादक बन गयी।लेकिन कोई इसकी चर्चा तक नहीं कर रहा।इसीतरह शारदा समूह के बंद अखबारों की खूब चर्चा हो रही है, पर रतिकांत बोस से तारा समूह के अधिग्रहण की खास चर्चा नहीं हुई। गौरतलब है कि तारा न्यूज के एफआईआर के आधार पर ही सुदीप्त की गिरफ्तारी हुई।
'36 चौरंगी लेन', 'परोमा', इत्यादि फिल्मों के लिए प्रसिद्ध अपर्णा सेन की नई फिल्म `इति मृणालिनी' मां-बेटी की कहानी है और पृष्ठभूमि सिनेमा की है, इसलिए अपर्णा सेन के जीवन की झलकियां भी फिल्म में हैं। बुढ़ाती हुई किसी जमाने की लोकप्रिय सितारा अपने विगत को याद करती है। युवा-वय की भूमिका कोंकणा सेन ने की है।अपर्णा सेन की फिल्म 'गोयनार बक्शो' अभी सिनेमाघरों में खूब चल रही है।अभिनेत्री मौसमी चटर्जी और कोंकणा इसमें है।अपर्णा सेन की पिछली फिल्मों में से एक 'द जैपेनीज वाइफ' में भी मौसमी ने एक वृद्धा का किरदार निभाया था।
कुल मिलाकर अपर्णा बंगाल और बाकी देश में अत्यंत सम्मानित अभिनेत्री और निदेशक हैं। बंगाल में बतौर संपादक भी उनकी जबर्दस्त साख है और फिलहाल राजनीति से उनका दूर दूर को कोई नाता नहीं है। इसीलिए शताब्दी की यह शिकायत शायद जायज भी है कि सिर्फ राजनीति हमें होने के कारण उनकी बदनामी हो रही है।
तृणमूल खेमे की दलील है कि सांसद होने की वजह से अगर कुणल घोष और शताब्दी कटघरे में हैं तो श्रद्धा समूह और दूसरी चिटफंड कंपनियों के मीडिया समूह, फिल्म निर्माण, अखबारों, पत्रिकाओं और दूसरी संस्थाओं से जुड़े शीर्षस्थ लोगों को क्यों नहीं जांच के दायरे में लाया जाता अब दीदी ने जो सबकी फाइले खोलकर सबको जेल में ठूंस देने की चेतावनी दी है, इससे ये लोग उत्साहित हैं और अपने नेताओं के बचाव में मुश्चैदी से डट गये हैं।
जाहिर है कि बंगाल में और छवियां ध्वस्त होने जा रही हैं और यह सिलसिला कब थमेगा, पक्ष प्रतिपक्ष के घनघोर युद्ध के कुरुक्षेत्र बंगाल में खड़ा होकर कोई बता ही नहीं सकता.
No comments:
Post a Comment