Monday, May 13, 2013

वाम मोर्चे में बगावत

वाम मोर्चे में बगावत​!

​​

एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​


​हाथी गड्ढे में गिरती है तो चींटी भी लात मारती है, वाम मोर्चे के बारे में अब यह कहावत चरितार्थ होने लगी है।


पैंतीस साल के वाम शासन काल में घटक वामपंथी दलों को माकपाई नेतृत्व के सामने कभी चूं तक करने की हिम्मत नहीं हुई। किसी ने कुछ कह भी दिया तो तुरंत माकपाई फरमान पाते ही सभी लोग सावधान की मुद्रा में आ जाते थे।नंदीग्राम, सिंगुर ,मरीचझांपा से लेकर कितने ही प्रकरण हुए, वामदलों ने माकपाई नीति का कभी विरोध करने की हिम्मत नही हुई।


अब सत्ता से बाहर वामदलों को आजादी मिल गयी है माकपाई वर्चस्व से।माकपा तृणमूली हमले के निशाने पर है और उसका मजबूत संगठन बिखर गया है। जनाधार खिसक गया है। तो घटक दलों की जुगत है कि अपनी दुकान अलग लगायी जाये!


माकपा की साख इतनी जल्दी नहीं लौटने ​​वाली है और सत्तादल तृणमूल कांग्रेस से जनता का तेजी से मोहभंग हो चुका है। इस गंदे पानी में अपना जाल फेंककर किस्मत आजमाने की ​​कोशिश हो रही है।


पहले भी आरएसपी के नेता जतीन चक्रवर्ती और कमल गुहा ऐसी कोशिश करके किनारे हो गये। अब फिर आरएसपी की ओर​

​से माकपा और तृणमूल के खिलाफ तीसरे मोर्चे के अभियान की अगुवाई करने लगे हैं आरएसपी नेता क्षिति गोस्वामी। ​

​​

​पार्टी उनका कितना साथ देती है और कौन कौन से दल इस जुगत में उनका साथ देंगे, इसका अभी पता नहीं चला है।


No comments:

Post a Comment

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Welcom

Website counter

Census 2010

Followers

Blog Archive

Contributors